तर्ज़ – बाईसा का वीरा जपसुरिस जाज्यो सा गुरु दाता थां की बाट निहारूँ सा, पधारो म्हारे अनमोलो घड़ियाँ। ॥टेर॥ गुरुदाता थां की……… गुरुदाता पलकों पंथ बुहारूँ सा, बिछाऊँ मग में फूलों की कलियाँ। गुरुदाता म्हारे आँगण पधारो सा, संग में तो ल्यावो शिष्यों की टोलियाँ ॥1॥ गुरुदाता थां की……… गुरुदाता (दयालू) चन्दन चौकी बिराजो…
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