तर्ज़- सीता माता की गोदी में हनुमत डारी मूँदर्ड़ी सुण ज्यो सुण ज्यो जी, गुरु दाता हेलो दीन को जी। हेलो दीन को जी, फर्योड़ा जीव को जी ॥टेर॥ प्रधान है शुद्ध प्रकृति माया, निमित्त कारण यह ईश कहाया। जड़ चेतन की सूक्ष्म गाँठ सूझ नाहीं पड़े जी ॥सु.-111॥ अविद्या जीव उपाधि माया, यामें कुटस्थ…
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